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मंगलवार, 20 अप्रैल 2010

khwab


tum kehte ho na
kaanch tut kar bhi
kaanch hi rah jaata hai
magar khwab kabhi nahi...

tum hi aake samjhao
isko,
meri aankhon ki
baahon me
toda hai dam jisne
yeh dil ab bhi
use khwab
kah raha hai.....
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तुम कहते हो ना
कांच टूट कर भी
कांच ही रह जाता है
मगर ख्वाब कभी नहीं....

तुम ही आके समझाओ
इसको,
मेरी आँखों की बाहों में
तोडा है
दम जिसने ..
यह दिल अब भी
उसे ख्वाब कह
रहा है.....

----आंच----

----aanch----

6 टिप्‍पणियां:

दिलीप ने कहा…

achcha waah....
http://dilkikalam-dileep.blogspot.com/

Shekhar Kumawat ने कहा…

bahut khub

jabardast he

shekhar kumawat

http://kavyawani.blogspot.com/

स्वप्निल कुमार 'आतिश' ने कहा…

umda hai

rajeevspoetry ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति.
देवनागरी में लिखें तो पढ़ने में आसानी होगी.

sangeeta swarup ने कहा…

आँखों की बाहें....बहुत सुन्दर ...

प्यारी नज़्म..कोमल भाव लिए हुए...'


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संजय भास्कर ने कहा…

दिल के सुंदर एहसास
हमेशा की तरह आपकी रचना जानदार और शानदार है।