समर्थक

शुक्रवार, 26 नवंबर 2010

aks

एक इन्द्रधनुष की कंघी
बालो
की लटो को संवारे हुए...
खुशबू की किनारी वाली
पंखुरी की साड़ी....
पलखो पे ज़िया
की एक फुहार .....
माथे पे
आफताबी शबनम
की एक बिंदी......

तुम एक उम्र जो
बेहाल दिखे
तो मुझे माफ़ करना....

कल ही सुना है मैंने
शुआओं को आईने
से कहते हुए
"मैं अक्स हूँ तुम्हारा"

-----आंच------